मेरी कविताएं -मानस-'चितांत'
:: चितांत ::
उन्हें,
भविष्य की चिन्ता हुई
डर समाया हुआ था
अन्दर तक, उनके
अब हरिया, मनिया ... हरवाह के भी
बेटे रूकूल जाने लगे हैं
क्या होगा, भविष्य... ?
खेतों का ! 'बच्चों' का !!
उड़ा दी अपवाह उन्होने
बच्चे उठाने वाले 'टोटका' की
स्कूल सूने हो गये
और वे निश्चिंत हो गये
(टीप :- (1) कुछ वर्षों पूर्व, सरगुजा क्षेत्र में बच्चे उठाने वाले 'टोटका' (अदृश्य अमानवीय शक्ति) के अपवाह के कारण महीनों तक ग्रामीण अपने बच्चों को घर के कमरे में ही बन्द करके रखते थे।
(2) सरगुजा में बंधुआ मजदूर को 'हरवाह' कहा जाता है, उसे वार्षिक मौखिक अनुबन्ध के आधार पर मामूली पारिश्रमिक धान और नकद के रूप में दिया जाता है, इसके ऐवज में वह साल-भर 24 घण्टे खेत-खलिहान की देख-रेख करता है। वैसे तो भारतीय कानून के अनुसार यह गैरकानूनी है परन्तु अब भी यहॉं के गॉंवों इसका चलन जारी है।)
Wednesday, May 21, 2008
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2 comments:
क्या बात है!! वाह!
बहुत सही है भाई.
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