Thursday, May 22, 2008

भूकम्‍प के बाद

मेरी कविताएं -मानस-'भूकम्‍प के बाद'

:: भूकम्‍प के बाद ::

भूकम्‍प के बाद
आदमी -

आदमी को खोजता है / पहचानता है

जाति, धर्म, धन और बुद्धि...
सब ढ़केल दिये जाते हैं, पीछे

आगे बढ़ता है आदमी
हाथ थामने -
आदमी का

तेज हो रही है,
यह मद्धिम आवाज़ -
'मत करो प्रतीक्षा, भूकम्‍प का' !

2 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत खूब-

झेल चुका हूँ जबलपुर में १९९७ का भूकंप और उसके बाद लोगों में आया व्यवहार परिवर्तन.

उम्दा रचना. बधाई.

समय चक्र said...

उम्दा रचना. बधाई