Tuesday, August 5, 2008

क्‍या भारत का सुप्रीम कोर्ट बन्‍द हो रहा है ?


संदर्भित समाचार विश्‍व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिए शर्मसार करने वाला और सदमा पहुँचाने वाला है। गले तक भ्रष्‍टाचार में डुबे इस देश में न्‍याय की एक मात्र किरण सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही नजर आती थी, अब यदि उसने भी.... भ्रष्‍ट तंत्र के विरूद्ध लाचारी व्‍यक्‍त करते हुए अपनी हार मान ली है तो ऐसे न्‍याय के मंदिर के अस्तित्‍व का क्‍या अर्थ ? कृपया बन्‍द कीजिए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने का यह ढ़कोसला। जनता के पसीने से निचोड़ी गई कमाई से चलने वाले ऐसे सब्‍जबाग़ दिखाने की दुकानदारी पर ताला लगाईये।
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
संदर्भ साभार : जागरण-याहू इंडिया
(http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4696689.html)
इस देश की भगवान भी मदद नहीं कर सकता
Aug 05, 04:24 pm

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। 'इस देश की मदद भगवान भी नहीं कर सकता, वह भी सिर्फ मूक दर्शक ही बना रहेगा।' यह निराशाजनक तीखी टिप्पणी सुप्रीमकोर्ट ने मंगलवार को की। कोर्ट सरकारी बंगलों में अवैध कब्जे के अपराध को गैरजमानती बनाए जाने का सुझाव ठुकराए जाने से नाराज और निराश था। कोर्ट ने सरकार के रवैये की निंदा करते हुए हुए कानून में संशोधन करने और धारा 441 को गैरजमानती अपराध बनाए जाने के मामले में सुनवाई मंगलवार को बंद कर दी।
न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल व न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी की पीठ सरकार के, कानून में संशोधन की जरूरत से इनकार किए जाने के जवाब से खासी नाखुश दिखी। पीठ ने अवैध कब्जेदारों को बाहर निकाले जाने के प्रति सरकार के ढीले रवैये पर तीखी टिप्पणियां कीं। पीठ ने कहा कि पूरी सरकारी मशीनरी भ्रष्ट है। राज्यों के मुख्य सचिव दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते। उनमें क्लर्कों की राय से अलग जाने का साहस नहीं है। जिम्मेदारी तय करने के बाद भी क्या होगा। कानून है कि जो सरकारी आवास में ज्यादा दिन रहे, उसे बाहर निकाला जाए लेकिन कोई भी सरकार यह काम नहीं कर रही है।
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी ने एक किताब का जिक्र किया जिसके मुताबिक यदि एक अधिकारी कानून लागू नहीं करता तो, उसे निकाल दिया जाए। जब कोई मंत्री कानून लागू नहीं करे तो, उसे निकाल दिया जाए लेकिन जब कोई सरकार कानून लागू न करे तो, किताब में उत्तार था कि उस देश की भगवान ही मदद कर सकता है। इस पर न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा कि भगवान ही इस देश की मदद करे। लेकिन दूसरे ही क्षण उन्होंने कहा कि इस देश की मदद भगवान भी नहीं कर सकता। वह भी मूकदर्शक ही बना रहेगा।
कोर्ट ने कहा कि अवैध कब्जेदारों के रवैये को देखते हुए लगता है कि केंद्र व राज्य सरकारें कुछ नहीं करना चाहतीं। इस कोर्ट के आदेश पर सरकार साधारण कानून के तहत धीमी कार्रवाई करते हैं। जब केंद्र सरकार के वकील अमरेंद्र शरण ने कहा कि सरकार कानून में दी गई व्यवस्था के मुताबिक कार्रवाई करती है तो पीठ ने नाराज होते हुए कहा कि कोर्ट के दबाव के कारण, कोर्ट के हंटर पर। शरण ने कहा कि क्वासी [अ‌र्द्धन्यायिक] ज्यूडिशियल अथारिटी को सरकार निर्देश नहीं दे सकती। कोर्ट चाहे तो सुनवाई का समय तय कर दे।
कोर्ट ने कहा कि सरकार के जवाब के बाद इस मामले की आगे सुनवाई की कोई जरूरत रह जाती है। मामले की सुनवाई बंद करते हुए कोर्ट ने सरकार के वकील से कहा कि अब वे खुश होंगे। उनके अधिकारी जेल नहीं जाएंगे। हालांकि कोर्ट सरकारी बंगले खाली कराने के एकाकी मामलों की सुनवाई जारी रखेगा। राजस्थान सरकार की अर्जी पर आठ अगस्त को सुनवाई होगी।