मेरी कविताएं -मानस-1-'पहचान'
:: पहचान ::
आप मुझे
इतना ही पहचानते हैं
जितना मैं
कि दिखते हैं, हम
आदमी जैसे
न आपने और न मैंने
समेटने की सोची, इस दूरी को
कहीं...! यही दूरी तो...
आदमी की पहचान नहीं ?
Saturday, May 17, 2008
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